भाई सुरेश चिपलूनकर आप का पोस्ट "टिप्पणी सम्बन्धी खुराफ़ात – एक गम्भीर मसला, कृपया सभी ब्लॉगर ध्यान दें…"
पढा था इसके बाद मै भी इस टिप्पणी सम्बन्धी खुराफ़ात को अपने नाम से होता महसूस कर रहा हूँ !
कल सलीम खान के उस पोस्ट पर जहा शीर्षक में उसने घोषणा की है "मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं--वंदे मातरम !!!"
पर अपने नाम ( उम्दा सोच ) से टिप्पणी देखी जो मैंने नहीं की थी, नाम पर माउस द्बारा खोले जाने पर ये भी Blogger Profile पर ना जा कर मेरे ब्लॉग का पता बता रहा है !
http://swachchhsandesh.blogspot.com/2009/11/blog-post_06.html?showComment=1257517102169#comment-c1883610374200476733
इस टिपण्णी में सलीम खान की भरपूर खुशामद कर उसके मनमाफिक लिखा पाया,जिससे लग रहा है की करतूत उसके खुद की या उसके किसी गुर्गे की ही ज़रूर है !
वैसे भी जबसे मेरी नज़र सलीम और कैरान्वी के नापाक मंसूबो पर पड़ी है मैंने उनका जीना हराम कर रक्खा है! सिर्फ सलीम के ब्लॉग स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ (नाम का सिर्फ!!! असल में उसका नाम होना चाहिए "इस्लाम के नाम पर सलीम के नापाक मनसूबे" ) सिर्फ इस ब्लॉग पर ही ३६ सवाल टिप्पणि के ज़रिये मैंने किये जिनमे से एक का भी जवाब वो दे न सका,कैरान्वी के "हमारे अंजुमन" पर मेरी टिप्पणि ने मानो दुम पर पैर रख दिया हो ऐसा हड़कंप मचाया की वो साइबर मौलवी और सलीम समेत तमाम को ललकारने लगा मेरा जवाब देने को!!!
फलस्वरूप मुझे जवाब देने का व्यर्थ प्रयास किया गया (आप स्वयं देखे )! http://hamarianjuman.blogspot.com/2009/11/vande-matram-islamic-answer.html
खुद को अपनी ही शुरू की हुई पेचीदगी में फसा पा अब वो ही इस पीठ में चुरा घोपने के अपने असल फितरत पर उतरा महसूस होते है !
मै गैरहिन्दू धर्मो का न तो विरोधी हूँ ना ही शुएब भाई , महफूज भाई जैसे प्रगतिशील लोगों की आस्था को नीचा दिखाना मेरी मंशा रही है ! पर बोक्सिंग रिंग पर ललकारने पर सलीम और कैरान्वी जैसो को जवाब भी उसी शैली में दिया जायेगा !
मै आप सा कोई बड़ा ब्लॉगर बिलकुल नहीं हूँ जो और किसी मकसद से कोई ऐसा करता मालूम पड़े, क्युकी आप भुक्तभोगी है अतः आप से निवेदन है की इस प्रकार के छदम योद्धा से किस तरह निपटा जाए मार्गदर्शन कीजिये !
Saturday, November 7, 2009
Wednesday, October 7, 2009
मर्द बेचारा भाग-१
सम्भवतः उसे पहले निम्नलिखित का सामना करना पड्ता!
कहाँ जा रहे हों ?
किसके साथ ?
क्यों ?
कैसे जा रहे हो ?
क्या खोजने ?
क्यों सिर्फ़ तुम ही जा रहे हो ?
मै यहाँ अकेले क्या करुँगी ?
क्या मै भी तुमहारे साथ चलूँ ?
कब वापस लौटोगे ?
डिनर घर पर ही करोगे ना ?
मेरे लिये क्या लाओगे ?
लगता है तुम सब सोची समझी चाल के तहत कर रहे हो... ?
झूठ मत बोलो...
तुम ऐसे कार्यक्रम क्यो बनाते हो ?
लगता है आगे के लिये भी तुमने ऐसे ही कार्यक्रम सोच रखे है...
जवाब दो... क्यों ?
मै मायके जाना चाहती हूँ !
मै चाहती हूँ तुम पहले तुम मुझे वहाँ छोड के आओ...
मैं कभी लौटना नहीँ चाहती...
मैं नही लौटुंगी...
तुम मुझे रोक क्यों नही रहे हो ?
मैं नही समझ पा रही हूँ के ये खोज वोज का चक्कर क्या है?
तुम तो हमेशा ऐसा ही करते हो !
पिछली बार भी तुमनें ऐसा ही किया था...
आज कल तुम यही सब करते रहते रहते हो कोई काम का काम क्यॊं नही करते...
मैं अबतक ये नहीं समझ पा रही हूँ कि तुम्हारे लिये खोजने को अब बचा क्या है...?
Saturday, September 26, 2009
श्री दुर्गा चालीसा

निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली उजियारी ।।
शशि ललाट मुख महा विशाला । नेत्र लाल भृकुटी विकराला ।।
रुप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ।।
तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ।।
अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ।।
प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ।।
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रहृ विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ।।
रुप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्घि ऋषि मुनिन उबारा ।।
धरा रुप नरसिंह को अम्बा । प्रगट भई फाड़कर खम्बा ।।
रक्षा कर प्रहलाद बचायो । हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो ।।
लक्ष्मी रुप धरो जग माही । श्री नारायण अंग समाही ।।
क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ।।
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ।।
मातंगी धूमावति माता । भुवनेश्वरि बगला सुखदाता ।।
श्री भैरव तारा जग तारिणि । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ।।
केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ।।
कर में खप्पर खड्ग विराजे । जाको देख काल डर भाजे ।।
सोहे अस्त्र और तिरशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ।।
नगर कोटि में तुम्ही विराजत । तिहूं लोक में डंका बाजत ।।
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ।।
महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ।।
रुप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ।।
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ।।
अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ।।
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर नारी ।।
प्रेम भक्ति से जो यश गावै । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे ।।
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताको छुटि जाई ।।
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ।।
शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ।।
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहू काल नहिं सुमिरो तुमको ।।
शक्ति रुप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछतायो ।।
शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ।।
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ।।
मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ।।
आशा तृष्णा निपट सतवे । मोह मदादिक सब विनशावै ।।
शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरों इकचित तुम्हें भवानी ।।
करौ कृपा हे मातु दयाला । ऋद्घि सिद्घि दे करहु निहाला ।।
जब लगि जियौं दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ।।
दुर्गा चालीसा जो नित गावै । सब सुख भोग परम पद पावै ।।
देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी ।।
Wednesday, September 23, 2009
राष्ट्रकवि को जन्मदिन पर श्रद्दांजली
Friday, September 4, 2009
विरहिन की व्यथा
Sunday, August 30, 2009
डेमोक्रेसी Vs मोदी का गुजरात

अपने सम्विधान पर बचपन से हम २६ जनवरी को खूब गर्वित इतराते है, उसपे पालन कर जीने मरने की कसमे खाते है! कमाल है सरकारे ही अब सम्विधान की पर्वाह नही करती.....
कारण?.....
खैर..... एक ताजा वाक्या उदाहरण के तौर पर ले,
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता...
गुजरात मे मोदी साहब ने जसवंत सिंह की पुस्तक को प्रतिबन्धित कर दिया है!आज जब जस्वंत जी अपनी बात कहते है तो अपने ही उनका मुंह बन्द करने पे आमादा है!
यानी......
कहाँ है भई सम्विधान मे उल्लेखित Article 19 अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता?
है तो कहाँ ....? और है तो किसके लिये.....?
जसवन्त जी की पुस्तक मैने अभी तक पढी नही है बगैर इसके मै कुछ बाते ठीक ठीक जानता हूँ!
जसवंत जी जो भी कह रहे है ये उनके अपने विचार है ...क्या जसवंत जी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नही है? और गुजरात की पढी लिखी जनता को इस प्रकार पुस्तक से वंचित करना क्या गुजराती बुद्दिजीवी वर्ग के अधिकारों का हनन नही है?
भाई पढने दीजिये सही गलत की विवेचना तो वे पढ्ने के बाद ही करेंगे!
क्या इस तरह मोदी जी जसवंत जी का मुह बन्द करने के साथ गुजरातियों के कान भी बन्द नही कर रहे है?
मोदी जी जिस राम राज को लाने की बात करते है उसमे अब मुहँ बन्द किया जायेगा...? ऐसी कौन सी डेमोक्रेसी भाई? और कहाँ पाई जाती है...?
अब तक खुद के लिये मोदी जी कहते थे मै तो बोलुंगा जिसे नही सुनना वो अपना कान बन्द कर ले...
तो जस्वनंत जी का मुहँ क्योँ बन्द करवा रहे है?
आज जब गुजरात मे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रष्नवाचक चिन्ह लग गया है,तो कल वहाँ लोकतंत्र पर भी सीधा प्रष्नवाचक चिन्ह लग सकता है!
क्या आप को नही लगता इस तरह मोदी जी सम्विधान मे उल्लेखित Article 19 अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता का हनन कर रहे है?
Saturday, August 22, 2009
मुर्दा जिन्ना का ज़िन्दा जिन्न
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विभाजन और उसके तहत मौते "गदर" जिम्मेदार हिन्दु और मुसलमान खुद रहे हैं!
रही बात जिन्ना की जो उन्हों ने जो किया सही-गलत ये कथित सेकुलर ढोंग से बाहर आ कर वास्तविक परिपेक्ष को देखते हुए बात करने का विषय है!
जिन्ना की औकात कभी निर्णायक की नही थी प्रथम दोष उनका है ("चाहे जिस कारण हो") जिन्होंने सहमती दी और निर्णय घोषित किया!
खैर वो रही बीती बात...अब जिसे भाये वो लकीर पीटे!
मै निवेदन कर पूछता हूँ आप सब गणमान्य जनों से कि आज वो कौन सा राजनेता है जिसका जिन्न जिन्ना से बडा नही है?
जिन्ना ने हिन्दु और मुसलमान में बाँटा "ठीक है" तो अब वो कौन है जो SC ST OBC Backward कोटे में हिन्दु मुसलमान दोनो को छिन्न भिन्न कर रहे है? कह दीजिये उनका जिन्न जिन्ना से छोटा है!!!
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